x

Sunil Gupta / Blog

मजा किसी को, सजा किसी को….

तू करके चोरी फंसा किसी को. मजा किसी को, सजा किसी को.. जो गर तरक्की तुझे है करना. दबंग बनके दबा किसी को.. CWG, 2G, आदर्श, चारा. तू कर घोटाले, फंसा किसी को.. सफेद कपडे, दिलों में कालिख. दिखा किसी को, छुपा किसी को.. कसाब पर कर करोडों खर्चे. कमाई किसी की, लुटा किसी को.. ये जनता तो है ही गूंगी-बहरी. कि चाहे जैसे, नचा किसी को.. हजारों वादे हम करके मुकरे. ना पूरा हमने किया किसी को.. भगवान है, अब तो पैसा-पावर. कि अब तो सजदे अता इसी को.. मँहगाई कम होगी सब्सिडी से. कि दे किसी को, लुभा किसी को.. ये काला धन रख स्विस तिजोरी में. कि देश अपना लुटा किसी को.. मुजरिम है इस गुनह का, मंत्रि-बेटा. कर अन्दर लगा के दफा किसी को.. फिर ’श्वेत’ तू रह गया ना तन्हा. कब रास आई, वफा किसी को.. तू फिर आ इस धरती पर ऐ खुदारा! बचा किसी को, मिटा किसी को..

एक नया सा जहाँ बसायेंगे…

एक नया सा जहाँ बसायेंगे. शामियाने नये सजायेंगे.. जहाँ खुशियों की बारिशें होंगी. गम की ना कोई भी जगह होगी.. रात होगी तो बस सुकूं के लिये. खिलखिलाती हुई सुबह होगी.. कोई किसी से ना नफरत करेगा. करेगा प्यार, मोहब्बत करेगा.. जहाँ बच्चे ना भूखे सोयेंगे. अपना बचपन कभी ना खोयेंगे.. देश का होगा, विकास जहाँ. नेता होंगे सुभाष जैसे जहाँ.. जुल्म की दस्तां नहीं होगी. अश्क से आँख ना पुरनम होगी.. राम-रहीम में, होगा ना कोई फर्क यहाँ. ऐ खुदा तू भी, रह सकेगा जहाँ – २.. ना बना पाये, इस धरती को हम, स्वर्ग तो क्या. इन्सां के रहने के, काबिल तो बना सकते हैं… इन्सां के रहने के, काबिल तो बना सकते हैं…